- मनोज कुमार झा
आपके सामने
जो ख़बर है
दरअसल ख़बर वो नहीं है
जो ख़बर है
दरअसल ख़बर वो नहीं है
ख़बर छुपा ली गई है
बड़ी सफ़ाई से
बड़ी सफ़ाई से
आपको चंद हवाले
दे दिए गए
आप आंकड़ों में
उलझ गए
दे दिए गए
आप आंकड़ों में
उलझ गए
वो ख़बर
छप नहीं सकती
वो दुर्घटना में मौत
हत्या
बलात्कार और दंगे की
ख़बर नहीं
छप नहीं सकती
वो दुर्घटना में मौत
हत्या
बलात्कार और दंगे की
ख़बर नहीं
वो मंगल पर यान पहुंचने की
प्रधानमंत्री का दसलखिया सूट
करोड़ों में नीलाम होने की
ख़बर नहीं है
वो ख़बर किसी को
फांसी पर लटकाने की भी
नहीं है
प्रधानमंत्री का दसलखिया सूट
करोड़ों में नीलाम होने की
ख़बर नहीं है
वो ख़बर किसी को
फांसी पर लटकाने की भी
नहीं है
वो तो बड़ी संगीन
ख़बर है
इतनी कि किसी अख़बार में
छप नहीं सकती
ख़बर है
इतनी कि किसी अख़बार में
छप नहीं सकती
वो हमारे या आपके
होने या न होने से
शायद ताल्लुक रखती है।
होने या न होने से
शायद ताल्लुक रखती है।