Tuesday, 18 November 2014

गीत

जैसे वन में मेह है बरसे
जैसे जले जवानी

जैसे पिय की आस लगी है
जैसे वकत गंवानी

जैसे नदिया की धारा है
जैसे आनी जानी

जैसे झूमर पार के नाचे
छलती ये जिंदगानी।

- मनोज कुमार झा
एक जमूरा

एक जमूरा आगे-आगे
बिका मीडिया पाछे-पाछे।

ढोल और मृदंग बजाबे
मीडिया उसके सदके जाबे।

लाशों का कारोबार करे है
अस़्मत का व्यापार करे है।

धर्माधीशों का पिट्ठू है
थैलीशाहों का सेवक है।

देस बेचने की बातें ये
सात समंदर पार करे है।
- मनोज कुमार झा

Saturday, 8 November 2014

मनोज कुमार झा का एक शे'र

काला-काला टुकड़ा-टुकड़ा धुआं-धुआं आकाश है
इस शोर में है खोखलापन मुरदा पड़ा अहसास है।
- मनोज कुमार झा

किस ऑफ लव क्या है....

'किस ऑफ लव' संस्कृति विरोधी आयोजन है। इस तरह भगवा प्रतिक्रियावाद का विरोध नहीं किया जा सकता। जो युवा यह आयोजन कर रहे हैं, जाहिर है वो उच्च और मध्य वर्ग के हैं और उन्हें जनता की बुनियादी समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। सार्वजनिक स्थलों पर चूमाचाटी, लिपटाचिपटी और अंगप्रदर्शन की इज़ाजत किसी संस्कृति में नहीं है। यह अराजक भोगवाद का परिचायक है।

Friday, 7 November 2014

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-10


बंदानवाज़ औ' दिलनवाज़ में फ़र्क तो देखो जरा
एक सिंहासन पे बैठा एक दर-दर भटके है।

- मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-9


रेत की मानिंद फिसल कर रह गए
हम तो इक शमां जला कर रह गए।
किसने पूछा किसने मेरा नाम लिया
क्यों किसी के लिए मरते-जीते रह गए।

- मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-8


तुमने रक़ीबों से क्या ख़ूब दिलजोई की
उसकी सुध ना ली वो भी है आशिक़ तेरा।

- मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-7


यहां अपना कौन था जो मुझसे बात करता
एक तुम मिले साथी इतने गुमसुम-से क्यों हो।

- मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-6


ख़ुद से ही ख़ुद का नंगापन छुपाओगे
बोलो सरेराह तुम कैसे चल पाओगे।

- मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-5


ये तेरी तलाश में हम कहां-कहां नहीं भटके
ये भी क्या नसीब रहा ख़ुद को ही भुला बैठे।

- मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-4


ये उनकी फ़ितरत जो देख के भी ना देखें
तुम तो सरसाम में बस नाम लिए जाते हो।

- मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-3


सिर्फ़ झूठा ही रहेगा सच कहां फ़िर जाएगा
जीत कर भी हारता क्या बस धकियाया जाएगा।

- मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-2


आवारगी भी अब नहीं होगी
दौर है ऐसा मुहब्बत भी नहीं होगी।

- मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा की कुछ खास गज़लें-1


झूठ का ही अब तलक क्यों राज क़ायम रहा
सत्य विजयी नहीं हुआ सिर्फ़ रहा संघर्ष में।

- मनोज कुमार झा