Saturday, 8 November 2014

मनोज कुमार झा का एक शे'र

काला-काला टुकड़ा-टुकड़ा धुआं-धुआं आकाश है
इस शोर में है खोखलापन मुरदा पड़ा अहसास है।
- मनोज कुमार झा

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