Thursday, 15 September 2016

यौन शोषण का मकड़जाल : सभी पार्टियों में हैं भेड़िए/श्यामा राय





क्या दामिनी की वेदना का कोई मोल नहीं? आज भी न जाने कितनी ही दामिनियों का दमन हो रहा है। यह चक्रवात थमने का नाम ही नहीं ले रहा। आज भी 16 दिसम्बर 2012 की वह घटना सबके दिलों को झकझोर देती है। लेकिन बलात्कार और यौन शोषण की घटनाएं कम होने के बजाय बढ़ती ही चली जा रही हैं। सबसे विडंबनापूर्ण बात तो यह है कि जिन पर कानून-व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वे ही लोग बलात्कार और यौन शोषण में लिप्त पाए जा रहे हैं। अभी हाल में ही राजनीतिक जीवन में शुचिता और नैतिकता का दावा करने वाली पार्टी आप के मंत्री संदीप कुमार का सेक्स स्कैंडल सामने आया।



किसी को जल्दी विश्वास नहीं हो रहा था कि दिल्ली के महिला एवं बाल विकास मंत्री जिन पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है, वह अपने कर्तव्य का निर्वाह इस प्रकार कर रहे हैं। जब उनकी अश्लील सीडी सामने आई तो लोगों का विश्वास राजनीतिक नेताओं से उठने लगा। यह ठीक है कि अरविंद केजरीवाल ने उन्हें बर्खास्त कर दिया, पर इस घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। दूसरी तरफ, संदीप कुमार ने यह दलील दी कि उसे दलित होने के कारण इस सेक्स स्कैंडल में फंसाया गया है। यह बात किसी के गले उतरने वाली नहीं थी। सबसे गलत तो यह रहा कि आप के नेता पूर्व पत्रकार आशुतोष ने संदीप कुमार का यह कह कर बचाव करने की कोशिश की कि यह दो वयस्क लोगों के बीच सहमति से बनाया गया संबंध था और इस पर सवाल नहीं खड़े किए जाने चाहिए। आशुतोष ने इस क्रम में यह भी कह दिया कि नेहरू, गाँधी जैसे नेताओं के ऐसे संबंध रहे हैं। यह सरासर गलत है। संदीप कुमार के भ्रष्ट और आपराधिक आचरण के बचाव में आशुतोष जैसे पत्रकार का यह कहना उसके मानसिक दिवालियेपन को ही दिखाता है। लेकिन सिर्फ आशुतोष ही नहीं, कुछ और लोग जो ऊंचे पदों पर रह चुके हैं, इसी तरह का तर्क दे रहे थे। इससे समझा जा सकता है कि स्त्रियों को लेकर मान्य और प्रतिष्ठित कहे जाने वाले लोग कैसा विचार रखते हैं। फिर अपराधियों की बात ही क्या है। बाद में संदीप कुमार के साथ सीडी में नजर आने वाली महिला सामने आई और सुल्तानपुरी थाने में उसने कहा कि राशन कार्ड बनवा देने के बहाने संदीप कुमार ने उसे बुलाया था और फिर दुष्कर्म किया था। बहरहाल, महिला के साथ यौन संबंध उसकी सहमति से बनाए गए या दबाव डाल कर या प्रलोभन देकर, यह ज्यादा मायने नहीं रखता, महत्त्वपूर्ण है मंत्री का अनैतिक आचरण जिसका बचाव उसकी पत्नी ने भी किया। उसके परिवार वाले ने भी किया और सबसे बढ़ कर संदीप कुमार ने अपने बचाव में दलित होने का तर्क दिया। कहा तो यहां तक जाता है कि वह सीडी अरविंद केजरीवाल के पास मीडिया में आने के पंद्रह दिन पहले ही पहुंच चुकी थी, पर उन तक सीडी पहुंचाने वाले ने कहा कि वे उसे दबाकर बैठे रहे। आखिरकार उसने मीडिया में सीडी दी। तब सारा मामला खुला।



इसी बीच, पंजाब के संगरूर में आप नेता विजय चौहान का नाम भी यौन शोषण के मामले में आया। विजय चौहान पंजाब का नहीं है। वह दिल्ली में आप का सक्रिय नेता था और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय था। पंजाबी अच्छी-खासी बोल लेने के कारण अरविंद केजरीवाल ने उसे इलेक्शन के प्रचार और संगठन आदि के काम के लिए पंजाब भेजा। वहां उसने ऑफिस मेड का यौन शोषण करना शुरू कर दिया। यह शोषण उसने लगातार जारी रखा। आखिरकार, तंग आकर उस मेड ने उससे रहम की भीख मांगी और उसे छोड़ देने को कहा, पर विजय चौहान उसे बहलाता-फुसलाता रहा। इसकी भी ऑडियो सीडी बन गई। सीडी मीडिया में आ गई। सारी बात पंजाबी में दर्ज है, जिसमें मेड कह रही है कि क्यों वह उसकी इज्जत के साथ खेल रहा है, उसके पति और रिश्तेदारों को पता चल जाएगा तो क्या होगा और विजय चौहान उसे बहला-फुसला रहा है। इस मामले में विजय चौहान पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वह आरोपों से इनकार कर रहा है। पर सीडी में उसकी ही आवाज है पंजाबी में जो मीडिया के पास मौजूद है। विजय चौहान अन्ना आन्दोलन में सक्रिय था। अरविंद केजरीवाल भी अन्ना आन्दोलन की ही पैदावार हैं। आम आदमी पार्टी के दो वॉलन्टियर्स ने ही विजय चौहान की दरिंदगी का भंडा सीडी बना कर फोड़ा था, अन्यथा किसी को इसकी खबर नहीं मिल पाती।



आप के एक और एमएलए पर यौन शोषण और छेड़छाड़ का आरोप लगा है। इसके साथ ही दिल्ली के आप विधायक देवेन्द्र सहरावत ने यह आरोप लगया है कि पंजाब में विधायकी का टिकट देने के लिए महिलाओं का शोषण किया जा रहा है। सहारावत ने कहा है कि उन्होंने इस बारे में अरविंद केजरीवाल को बताया है, पर वे कुछ सुनने को तैयार नहीं। तब जाकर उन्होंने मीडिया में यह बात रखी। बहरहाल, ऐसी घटनाएं महज किसी विशेष पार्टी से ही ताल्लुक नहीं रखतीं। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े टीनू जैन का नाम भी सेक्स रैकेट में सामने आ चुका है। उसकी तस्वीरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी, राजनाथ सिंह और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ हैं। वह नरेंद्र मोदी सेना का स्वयंभू अध्यक्ष भी है। भाजपा के बड़े नेताओं के साथ संबंधों के रसूख के बल पर वह ग्वालियर से हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट चला रहा था। सिर्फ यही नहीं, यौन शोषण करने वाले नेताओं और उनके गुर्गों की किसी दल में कमी नहीं है। आश्चर्य की बात ये है कि सार्वजनिक मंचों पर ये ही बढ़-चढ़ कर स्त्रियों के सम्मान रक्षा की बात करते हैं और बेटी बचाओ अभियान चलाते हैं।





ऐसे ही नेता महिलाओं पर तंज़ कसते हुए उनकी वेशभूषा पर टिप्पणी करते हैं। उन्हें तन को पूरी तरह से ढंक कर रहने की सलाह देते हैं। पर सच्चाई तो यह है कि वे खुद स्त्रियों के यौन शोषण में लिप्त रहते हैं। वैसे लोगों को संरक्षण देते हैं जो बलात्कारी हैं। सिर्फ आप ही नहीं, न ही भाजपा, तमाम दलों में ऐसे लोगों का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। भूलना नहीं होगा कि हाल ही में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में एक वामपंथी छात्र संगठन आइसा का बड़ा नेता अनमोल रतन एक छात्रा के साथ बलात्कार और ब्लैकमेल के मामले में लिप्त पाया गया। वह महीनों से एक शोध छात्रा का भयादोहन कर यौन शोषण कर रहा था। अंत में तंग आकर छात्रा ने पुलिस में उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया। कई दिनों तक जेएनयू कैम्पस में छुपे रहने के बाद जब उसे लगा कि बच पाना संभव नहीं होगा तो उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया और अभी तिहाड़ में बंद है। अनमोल रतन हाई प्रोफाइल छात्र नेता था। वह टीवी पर होने वाली बहसों में बुलाया जाता था और टीवी पर स्त्री स्वतंत्रता वगैरह विषयों पर जम कर बोलता था। दामिनी रेप कांड के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों में भी उसने बढ़-चढ़ कर भाग लिया था। जब ऐसा व्यक्ति बलात्कारी निकले तो जनता किस पर विश्वास करे। दरअसल, यह विश्वास के टूटते और खत्म होते जाने का समय है। राजनीति में भेड़िया युग है। बलात्कारी सभी पार्टियों में भरे हैं, चाहे आप हो, भाजपा हो या लेफ्ट। हर जगह आपराधिक मानसिकता के लोग भरे पड़े हैं और उन्हें सुरक्षा भी मिली हुई है। ऐसे में जनता को, खासकर औरतों को सोचना होगा कि वे क्या करें, कौन-सा कदम उठाएं।

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