हरियाणा विधानसभा में जैन मुनि तरुण सागर ने प्रवचन दिया। धर्म को पति और राजनीति को पत्नी बताया। यह कहा कि जैसे पत्नी पर पति का प्रभुत्व होता है, वैसे ही राजनीति पर धर्म का प्रभुत्व होना चाहिए। इस तरह धर्म और राजनीति के गठजोड़ की व्याख्या कर दी मुनिवर ने। दिगंबर जैन मुनि नग्न रहते हैं और विधानसभा को भी उन्होंने नग्नावस्था में ही संबोधित किया। भारतीय इतिहास में संभवत: किसी भी जनप्रतिनिधि सदन में किसी धर्मगुरु के संबोधन का यह पहला मामला है। यह मोदी (आरएसएस) के शासन में ही संभव हुआ। इस पर काफी कड़ी प्रतिक्रिया भी आ रही है, पर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के किसी अन्य नेता की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, न आएगी। ऐसा इसलिए कि यह सब उनके द्वारा ही प्रायोजित है। संभव है, इसके बाद भाजपा शासित अन्य राज्यों में भी बाबाओं-धर्मगुरुओं को प्रवचन देने के लिए बुलाया जाए।
बहरहाल, इस पूरी परिघटना और प्रवृत्ति पर मार्क्सवादी आलोचक-चिंतक अरुण माहेश्वरी ने जो टिप्पणी की है, वह गौर करने वाली है। उन्होंने लिखा है,“यह है भारतीय राज्य का चरित्र। यह घनघोर असभ्य और अशिक्षित जनों के राज्य में बदलता जा रहा है। सारी दुनिया इस गंदगी को देख रही है। इसीलिये हम फ्रांस की सरकार के बुर्कों पर पाबंदी लगाने के फ़ैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। कोई भी सभ्य राज्य अपनी सीमा में मध्ययुगीन असभ्यताओं के आयात की अनुमति नहीं दे सकता। अमेरिका ने हाल में उस भाजपाई सांसद को वीजा देने से इनकार कर दिया जो यहां यज्ञ के धुएं से ओज़ोन परत में दरार को पाटने की बात करता है। अमेरिकी दूतावास ने बहाना बनाया है कि उसे वहां पगड़ी पहन कर नहीं जाने दिया जायेगा। अभी का भारतीय राज्य हमारे यहां मध्ययुगीन बर्बरताओं को आमंत्रित कर रहा है।“ यह टिप्पणी खास महत्व रखती है। देखने में यह आ रहा है कि जब से मोदी सरकार आई है, उसने अवैज्ञानिक विचारों को बहुत ज्यादा बढ़ावा दिया है। यह सब राज्य प्रायोजित है। आरएसएस की विचारधारा क्या रही है, उससे सभी परिचित रहे हैं। पर विडंबना यह है कि राज्य अब आरएसएस के हाथ में है। इसलिए राजकीय संस्थाओं, विधानमंडलों और अन्य मंचों पर इस तरह की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। लगभग सभी शैक्षणिक और शोध संस्थानों में आरएसएस के लोग बैठाए चुके हैं। विश्वविद्यालयों में आरएसएस समर्थक लोगों को भरा जा रहा है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैज्ञानिकों के सम्मेलनों में घोर अवैज्ञानिक बातें बोलते सुने जा चुके हैं।
यहां यह भूलना नहीं होगा कि मोदी के सत्ता में आते ही हिंदूवादी कट्टर तत्वों ने गोविंद पानसारे, दाभोलकर समेत कई लोगों की हत्या कर दी जो अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चला रहे थे, कितने बुद्धिजीवियों और लेखकों को जान से मारने की धमकियां दी और भी न जाने कितने उत्पात किए। इस तरह, मोदी सरकार ने प्रगति-विरोधी कूढ़मगज तत्वों को खुल कर संरक्षण दिया। आरएसएस प्रमुख एवं इनके समर्थक साधु-संतों-बाबाओं के लगातार बयान आते रहते हैं कि हिंदू ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करें। ऐसे-ऐसे घृणित बयान आते हैं जो पहले कभी नहीं आए। लेकिन उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। अब इन्हें राज्य का समर्थन प्राप्त है।
क्या हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने एक पल के लिए भी यह नहीं सोचा कि जैन मुनि को सदन में बुलाकर वे कितना बड़ा संविधान-विरोधी काम कर रहे हैं। भारत का संविधान इस बात की इजाजत नहीं देता कि किसी भी धर्मगुरु को विधानसभा या संसद में प्रवचन देने के लिए बुलाया जाए। आश्चर्य की बात तो यह है कि विरोधी दल भी इस पर चुप रहे। जबकि अन्य मुद्दों पर वे तत्काल हंगामा करने लगते हैं। दरअसल, देश मे मोदी सरकार और हरियाणा में खट्टर सरकार दूसरे दलों की नाकामी की वजह से ही आ पाने में सफल हो सकी है। कल को क्या ये दूसरे धर्मों के गुरुओं को भी सदन में आमंत्रित करेंगे या सिर्फ नंगे बाबाओं को ही बुलाकर प्रवचन सुनेंगे। बहरहाल, जैनमुनि तरुण सागर का प्रवचन बहुत ही सांकेतिक रहा। धर्म पति है, राजनीति पत्नी। धर्म और राजनीति के गठबंधन को आरएसएस की विचारधारा के अनुकूल व्याख्यायित कर दिया मुनि ने। अब सवाल है कि क्या हरियाणा विधानसभा में हुए इस असंवैधानिक कृत्य का न्यायालय संज्ञान लेगा और खट्टर आदि महात्माओं से पूछेगा कि ऐसी नाजायज हरकत उन्होंने क्यों की। इसकी संभावना बहुत ही कम लगती है। इस लोकतंत्र में न्यायालय की अपनी सीमाएं हैं और वहां भी संघी मानसिकता वाले लोगों की कमी नहीं है।
भूलना नहीं होगा कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने किस तरह हरियाणा के माफिया मठाधीश संत राम रहीम का समर्थन लिया था, जिस पर बलात्कार और हत्या के केस हैं और जिसके पास कितनी दौलत है, उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। वह फिल्में बनाता है, उनमें अभिनय करता है और स्वयं को सर्वशक्तिमान बतलाता है। खट्टर सरकार का उससे संपर्क लगातार बना रहता है। अभी हाल मे स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज उससे मिलने गए थे। क्या खट्टर सरकार ऐसे बाबाओं और महंतों से दिशा-निर्देश लेती है? इसमें कोई दो राय नहीं कि खट्टर सरकार और जहां भी भाजपा की सरकार है, वहां ऐसे ही समाज-विरोधी लोग सत्ता के सबसे ऊंचे पायदान पर हैं। ऐसा कभी नहीं हुआ था। पर जो कभी नहीं हुआ था, वही भाजपा के राज में होगा। लोग तमाशा देखते रहें। हर तरह के अपराधियों और बलात्कारियों को इस राज में पूरी तरह छूट मिली हुई है। रोज ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं। उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है।
सवाल है, ऐसा कब तक चलता रहेगा? क्या लोगों की चेतना कुंद हो चुकी है? लगता तो ऐसा ही है। लोगों का प्रतिरोध किसी न किसी संगठन के माध्यम से सामने आता है। ऐसा कोई संगठन नज़र नहीं आता। कुछ संगठन हैं भी तो बहुत कमजोर हाल में हैं और उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज बन कर ही रह जाती है। विरोधी दलों में कोई संभावना नहीं दिखती। चौटाला बाप-बेटे जेल में हैं। कांग्रेस की जो हालत है, लोग देख ही रहे हैं। वामपंथी भी गहन निद्रा में हैं। ऐसे में, अब जनता भूखे रह कर भजन करे और मुनियों-बाबाओं का प्रवचन सुने। दूसरा कोई उपाय है नहीं।
बहरहाल, इस पूरी परिघटना और प्रवृत्ति पर मार्क्सवादी आलोचक-चिंतक अरुण माहेश्वरी ने जो टिप्पणी की है, वह गौर करने वाली है। उन्होंने लिखा है,“यह है भारतीय राज्य का चरित्र। यह घनघोर असभ्य और अशिक्षित जनों के राज्य में बदलता जा रहा है। सारी दुनिया इस गंदगी को देख रही है। इसीलिये हम फ्रांस की सरकार के बुर्कों पर पाबंदी लगाने के फ़ैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। कोई भी सभ्य राज्य अपनी सीमा में मध्ययुगीन असभ्यताओं के आयात की अनुमति नहीं दे सकता। अमेरिका ने हाल में उस भाजपाई सांसद को वीजा देने से इनकार कर दिया जो यहां यज्ञ के धुएं से ओज़ोन परत में दरार को पाटने की बात करता है। अमेरिकी दूतावास ने बहाना बनाया है कि उसे वहां पगड़ी पहन कर नहीं जाने दिया जायेगा। अभी का भारतीय राज्य हमारे यहां मध्ययुगीन बर्बरताओं को आमंत्रित कर रहा है।“ यह टिप्पणी खास महत्व रखती है। देखने में यह आ रहा है कि जब से मोदी सरकार आई है, उसने अवैज्ञानिक विचारों को बहुत ज्यादा बढ़ावा दिया है। यह सब राज्य प्रायोजित है। आरएसएस की विचारधारा क्या रही है, उससे सभी परिचित रहे हैं। पर विडंबना यह है कि राज्य अब आरएसएस के हाथ में है। इसलिए राजकीय संस्थाओं, विधानमंडलों और अन्य मंचों पर इस तरह की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। लगभग सभी शैक्षणिक और शोध संस्थानों में आरएसएस के लोग बैठाए चुके हैं। विश्वविद्यालयों में आरएसएस समर्थक लोगों को भरा जा रहा है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैज्ञानिकों के सम्मेलनों में घोर अवैज्ञानिक बातें बोलते सुने जा चुके हैं।
यहां यह भूलना नहीं होगा कि मोदी के सत्ता में आते ही हिंदूवादी कट्टर तत्वों ने गोविंद पानसारे, दाभोलकर समेत कई लोगों की हत्या कर दी जो अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चला रहे थे, कितने बुद्धिजीवियों और लेखकों को जान से मारने की धमकियां दी और भी न जाने कितने उत्पात किए। इस तरह, मोदी सरकार ने प्रगति-विरोधी कूढ़मगज तत्वों को खुल कर संरक्षण दिया। आरएसएस प्रमुख एवं इनके समर्थक साधु-संतों-बाबाओं के लगातार बयान आते रहते हैं कि हिंदू ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करें। ऐसे-ऐसे घृणित बयान आते हैं जो पहले कभी नहीं आए। लेकिन उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। अब इन्हें राज्य का समर्थन प्राप्त है।
क्या हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने एक पल के लिए भी यह नहीं सोचा कि जैन मुनि को सदन में बुलाकर वे कितना बड़ा संविधान-विरोधी काम कर रहे हैं। भारत का संविधान इस बात की इजाजत नहीं देता कि किसी भी धर्मगुरु को विधानसभा या संसद में प्रवचन देने के लिए बुलाया जाए। आश्चर्य की बात तो यह है कि विरोधी दल भी इस पर चुप रहे। जबकि अन्य मुद्दों पर वे तत्काल हंगामा करने लगते हैं। दरअसल, देश मे मोदी सरकार और हरियाणा में खट्टर सरकार दूसरे दलों की नाकामी की वजह से ही आ पाने में सफल हो सकी है। कल को क्या ये दूसरे धर्मों के गुरुओं को भी सदन में आमंत्रित करेंगे या सिर्फ नंगे बाबाओं को ही बुलाकर प्रवचन सुनेंगे। बहरहाल, जैनमुनि तरुण सागर का प्रवचन बहुत ही सांकेतिक रहा। धर्म पति है, राजनीति पत्नी। धर्म और राजनीति के गठबंधन को आरएसएस की विचारधारा के अनुकूल व्याख्यायित कर दिया मुनि ने। अब सवाल है कि क्या हरियाणा विधानसभा में हुए इस असंवैधानिक कृत्य का न्यायालय संज्ञान लेगा और खट्टर आदि महात्माओं से पूछेगा कि ऐसी नाजायज हरकत उन्होंने क्यों की। इसकी संभावना बहुत ही कम लगती है। इस लोकतंत्र में न्यायालय की अपनी सीमाएं हैं और वहां भी संघी मानसिकता वाले लोगों की कमी नहीं है।
भूलना नहीं होगा कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने किस तरह हरियाणा के माफिया मठाधीश संत राम रहीम का समर्थन लिया था, जिस पर बलात्कार और हत्या के केस हैं और जिसके पास कितनी दौलत है, उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। वह फिल्में बनाता है, उनमें अभिनय करता है और स्वयं को सर्वशक्तिमान बतलाता है। खट्टर सरकार का उससे संपर्क लगातार बना रहता है। अभी हाल मे स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज उससे मिलने गए थे। क्या खट्टर सरकार ऐसे बाबाओं और महंतों से दिशा-निर्देश लेती है? इसमें कोई दो राय नहीं कि खट्टर सरकार और जहां भी भाजपा की सरकार है, वहां ऐसे ही समाज-विरोधी लोग सत्ता के सबसे ऊंचे पायदान पर हैं। ऐसा कभी नहीं हुआ था। पर जो कभी नहीं हुआ था, वही भाजपा के राज में होगा। लोग तमाशा देखते रहें। हर तरह के अपराधियों और बलात्कारियों को इस राज में पूरी तरह छूट मिली हुई है। रोज ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं। उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है।
सवाल है, ऐसा कब तक चलता रहेगा? क्या लोगों की चेतना कुंद हो चुकी है? लगता तो ऐसा ही है। लोगों का प्रतिरोध किसी न किसी संगठन के माध्यम से सामने आता है। ऐसा कोई संगठन नज़र नहीं आता। कुछ संगठन हैं भी तो बहुत कमजोर हाल में हैं और उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज बन कर ही रह जाती है। विरोधी दलों में कोई संभावना नहीं दिखती। चौटाला बाप-बेटे जेल में हैं। कांग्रेस की जो हालत है, लोग देख ही रहे हैं। वामपंथी भी गहन निद्रा में हैं। ऐसे में, अब जनता भूखे रह कर भजन करे और मुनियों-बाबाओं का प्रवचन सुने। दूसरा कोई उपाय है नहीं।
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